बेबाक 'बकबक'....जारी है..

आओ बकबक करें......

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प्रवीण दीक्षित


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हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, कुछ और ही है!

Posted On: 27 Sep, 2015  
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मोदी की अरब यात्रा के यथार्थ

Posted On: 19 Aug, 2015  
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मोदी जी, हम तो आपके भरोसे ही हैं…

Posted On: 11 May, 2015  
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…ताकि समाज में न रह जाए कोई बालिका वधु

Posted On: 17 Mar, 2015  
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हमारे मोदी जी दिल्ली सरकार को पैसा ही नहीं देंगे…!

Posted On: 10 Feb, 2015  
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केजरीवाल हद से ज्यादा खुश न हों

Posted On: 8 Feb, 2015  
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गद्दी की गुदगुदी…

Posted On: 2 Feb, 2015  
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भगवान है कहां रे तू…

Posted On: 31 Dec, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सभी को यह समझना होगा कि हम सभी एक ही राष्ट्र के बाशिंदे हैं. हम सभी देश का हित चाहते हैं. फिर राजनीति के नाम पर लाइन ऑफ कंट्रोल क्यों खींच रहे हैं? हम केवल अपनी जीत में ही खुशी क्यों ढूंढना चाहते हैं? हम दूसरों की खुशियों को देखकर क्यों नहीं मुस्कुरा सकते? अपने-पराये की इस दीवार को हम क्यों नहीं तोड़ सकते? ये वो प्रश्न हैं जो आज की राजनीति से निकले हैं. लेकिन खुशी की बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने अन्य पार्टियों को भी स्वस्थ राजनीति करने का एक पाठ सिखाया है. जिन्होंने इसका पालन नहीं किया, वे भुगत रहे हैं. चुनावों की हार-जीत को हम अगर व्यापक रूप में देखें तो पक्ष में विपक्ष और विपक्ष में पक्ष का अक्स दिखता है. - बेहतरीन विश्लेषणयुक्त निष्कर्ष!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: प्रवीण दीक्षित प्रवीण दीक्षित

के द्वारा: प्रवीण दीक्षित प्रवीण दीक्षित

के द्वारा: प्रवीण दीक्षित प्रवीण दीक्षित

प्रवीण जी आजकी बेबाक बकबक - हिंदी सिसक रही है ... पढ़कर अच्छा लगा । देख्िाये समय की यही मांग है कि हम हिंदी में अंग्रेजी का प्रयोग भी करें जैसे आप ने भी किया है ''मदर टंग ही हैंगर पर टंगी हुई है !'' । पर एक भाषा में अन्य भाषा की शब्दों के इस्तेमाल को रोक नहीं सकते अगर ऐसा किया जाए तो यह अपने में सिमट कर रह जाएगी । आज हमें अंग्रेजी की बैसाख्िा की जरुरत इसलिए पड़ी है क्योंकि हमारा देश बहुभाष्िाक है । यहां के लोग ही हिंदी का सम्मान नहीं करते है क्योंकि यह गरीबों की भाषा है । सरकारी स्कुलों कि भाषा है । किसी नामी गिरामी पब्िलक स्कुल की नहीं अर्थात् अंग्रेजी माध्यम की भाषा नहीं है । अखबारों , समाचार , और भाषणों में हम बेबाक अपनी हिंदी पर बेबाक टीका - टिप्पणी करते हैं पर अपने ही घर में अपने बच्चों को ABCD रटवाने लगते हैं । यही तो है हमारा हिंदी प्रेम । अगर यह न भी करें तो हमारे बच्चे रोजगार के क्षेत्र में पिछड़ जाएगें ।

के द्वारा: udayraj udayraj

के द्वारा: Neha Kushwaha Neha Kushwaha

गौरैया को बचाने की पहल को मद्देनज़र रखते हुए भारत की नेचर्स फोरएवर सोसायटी ऑफ इंडिया और इको सिस एक्शन फाउंडेशन फ्रांस के साथ ही अन्य तमाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों ने मिलकर गत 20 मार्च को ष्विश्व गौरैया दिवसष् मनाने की घोषणा की और वर्ष 2010 में पहली बार विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। इस दिन को गौरैया के अस्तित्व और उसके सम्मान में रेड लेटर डे (अति महत्वपूर्ण दिन) भी कहा गया। इसी क्रम में भारतीय डाक विभाग ने 9 जुलाई 2010 को गौरैया पर डाक टिकट जारी किए। कम होती गौरैया की संख्या को देखते हुए अक्टूबर 2012 में दिल्ली सरकार ने इसे राज्य पक्षी घोषित किया। वहीं गौरैया के संरक्षण के लिए बम्‍बई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ने इंडियन बर्ड कंजरवेशन नेटवर्क के तहत ऑन लाइन सर्वे भी आरंभ किया हुआ है। कई एनजीओ गौरैया को सहेजने की मुहिम में जुट गए हैं, ताकि इस बेहतरीन पक्षी की प्रजातियों से आने वाली पीढियाँ भी रूबरू हो सके। देश के ग्रामीण क्षेत्र में गौरैया बचाओ के अभियान के बारे जागरूकता फैलाने के लिए रेडियो, समाचारपत्रों का उपयोग किया जा रहा है। कुछेक संस्थाएं गौरैया के लिए घोंसले बनाने के लिए भी आगे आई हैं। इसके तहत हरे नारियल में छेद कर, अख़बार से नमी सोखकर उस पर कूलर की घास लगाकर बच्चों को घोसला बनाने का हुनर सिखाया जा रहा है । ये घोसले पेड़ों के वी शेप वाली जगह पर गौरैया के लिए लगाए जा रहे हैं। वाकई,आज समय की जरुरत है कि गौरैया के संरक्षण के लिए हम अपने स्तर पर ही प्रयास करें। कुछेक पहलें गौरैया को फिर से वापस ला सकती हैं। बहुत बेहतरीन विषय पर सार्थक लेखन दिया है आपने ! अब कहाँ दिखती हैं ये गौरया ! हमने पता नहीं किस किस प्रजाति को ख़त्म करने का सोच रखा है ! बहुत सुन्दर आलेख

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

भारत-पाक युद्ध होने पर अमेरिका को अफगानिस्तान में अपनी सेना की संख्या में इजाफा करना होगा। जो शायद अब मुमकिन नहीं होगा क्योंकि अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना धीरे-धीरे हटा रहा है। इसका फायदा उठाकर भारत विरोधी आफगानिस्तान और पाकिस्तान के आतंकी संगठन कश्मीर में घुसपैठ कर भारतीय सेना के लिए मुसीबत पैदा कर सकते हैं। युद्ध होने की स्थिति में अफगानिस्तान में तैनात नाटो सेना के लिए ज्यादातर सैन्य सामग्री पाक बंदरगाहों और पेशावर के सैन्य डिपो से ही अफगानिस्तान पहुंचाया जाता है। अगर युद्ध हुआ तो इन हथियारों का उपयोग पाकिस्तान भारत के विरुद्ध कर सकता है। सही और सटीक लेखन प्रवीण जी ! युद्ध विभीषिका है ! बहुत सही विवेचना करी है आपने

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: प्रवीण दीक्षित प्रवीण दीक्षित

आदरणीय प्रवीण दीक्षित जी, कंट्रोल प्लस जेड कमांड के माध्यम से दिलचस्प आलेख, नवीन विचारों की ध्यान खींचने वाली प्रस्तुति; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "अब मैं समझ गया हूं कि कंट्रोल जेड कमांड का इस्तेमाल केवल तभी हो सकता है, जब तक आप कोई और कमांड न दें। और जिंदगी में तो हम सैकड़ों कमांड दे चुके हैं। इसलिए जिंदगी में कंट्रोल जेड संभव ही नहीं। ऐसे में यदि जिंदगी की कोई स्टोरी उड़ गयी है तो पुरानी इबारतों के मोह में न पड़कर अपनी जिंदगी की स्लेट पर नयी इबारत लिख लें। और जहां तक मेरा प्रश्न है तो मैं इस कमांड का प्रयोग करके अपना बचपन वापस पाना चाहूंगा। तभी तो मैं अक्सर जगजीत सिंह का रूहानियत भरा गीत गुनगुनाता हूं- ’ये दौलत भी ले लो,ये शोहरत भी ले लो ,भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी,मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी’"

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

के द्वारा: abhijeettrivedi abhijeettrivedi

प्रवीन जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति! पढ़ा तो पूरा ...पर प्रतिक्रिया सिर्फ बचे हुए खाने पर ही दे रहा हूँ. मैंने काफी पहले लिखा था "हम कहाँ बदले हैं" उसी की कुछ पंक्तियाँ --आजकल पार्टियाँ बुफे सिस्टम से होती हैं, इसमें सबको छूट रहती है कि अपनी पसंद का खाना आप स्वेच्छा से ले सकते हैं. वहां तक तो ठीक है, पर हम अपनी पेट का अंदाजा खुद नहीं लगा सकते हैं. एक बार में ही इतना खाना ले लेंगे कि बाद में उसे प्लेट में ही छोड़ना पड़े. और वही खाना दुसरे शुबह अखाद्य हो कर गन्दगी फैलाता है. अच्छा खाना हम बर्बाद करते हैं और …. मेरे निवास के पास ही एक बड़ा सा मैदान है जिसमे एक साथ तीन तीन पार्टियाँ की जाती है ... और सुबह फेंके गए खाने का अंदाजा आप लगा सकते हैं ... खाना ऐसा ख़राब हो जाता है की गायें भी उधर मुंह नहीं मारती ... आप अगर पास से गुजर रहे हों तो नाक बंद कर जल्दी जल्दी भागना पड़े! और क्या कहें ....

के द्वारा: jlsingh jlsingh

"गांव एक होने वाला शहर है जिसके लोगों को शहर बसाने के लिए खदेड़ा जाने वाला है। गांव एक गैराज है जहां सरकार की योजनाएं खड़ी की जाती हैं ।" और "बेल की गाछ के नीचे रहने वाला भूत कोई और नहीं बल्कि योजना आयोग का प्लान है। हमारे गांवों में अर्बन यानि शहरी भूत आ गया है.दिल्ली के योजना भवन में जैसे ही किसी पुरानी योजना की मौत होती है और उसका नई योजना के रूप में पुनर्जन्म होता है,तब बेल के गांछ के नीचे वाला यह भूत डांस करने लगता है।" सुंदर शैली में, गाँवों के वर्तमान परिदृश्य का विश्लेष्ण. गाँवों के उत्थान एवं विकास के नाम पर, जो कुछ शासन द्वारा किया जा रहा है; उससे वहां के लोगों के जीवन स्तर और जीविका के साधनों में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है. यह मुद्दा आपकी इस पोस्ट ने, बहुत प्रभावी तरीके से उठाया है. बधाई एवं साधुवाद.

के द्वारा: vinitashukla vinitashukla

गांव में कोई आता नहीं है। सब जाते ही हैं। कोई दिल्ली दुकान लगाने जा रहा है,तो कोई ब्लाॅक अफसर से मिलने कचहरी जा रहा होता है।ट्रैक्टर की ट्राली में भरकर औरतें गंगा स्नान को जाती हैं।टैम्पो में पीछे लटककर बच्चे स्कूल जाते हैं।इनमें से कुछ तो केवल मिड-डे मील लेने जाते हैं,वहीं बाकी अनजाने में ही सही देश की साक्षरता दर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं इनके पापा लोग सवेरे-सवेरे हाथों में टिफिन का डिब्बा लिए अपने अपने दुपहिया से नौकरी और मजदूरी करके देश की जीडीपी बढ़ाने निकल जाते हैं। हकीकत बयान करता सार्थक लेख ! कृत्रिम विकास की पोल खोलता एक सार्थक लेखन इस मंच को देने के लिए बधाई !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

प्रवीण जी तुम्हें तो सिर्फ काम की चिंता होनी चाहिए ! फल की चिंता करने का तुम्हें कोई अधिकार नहीं है ! यह गीता का वाक्य है ! भगवान कृष्ण का आदेश है ! जिसे तुम्हें मानना ही होगा ! अगर तुम नही मानोगे तो यह “कोप देवता” तुम्हें जला कर राख कर देंगे ! “अपहरण देवता” तुम्हारी जवान बहू-बेटियों को उठा कर ले जांयेंगे ! “पुलिस देवता” तुम्हारी पत्नी का चीर-हरण करके तुम्हारी झोंपडी में आग लगा देंगे ! मेहनत मजदूरी करना तुम्हारा फर्ज है ! तुम्हारा कर्तव्य है ! तुम्हारा धर्म है ! फिर पैसे किस बात के ? मेहनत करने के बाद तुम पैसे मांगते हो इसी लिए तो तुम गरीब हो ! अमीर लोग तो बिना मेहनत किए ही पैसे छीन लिया करते हैं, इसीलिए वो अमीर हैं !, सार्थक लेख ,बधाई लिखते रहिये

के द्वारा: rekhafbd rekhafbd

के द्वारा: ajaykr ajaykr

आदरणीय मित्रवर! आज संभवतयः पहली बार आपको पढ़ रहा हूँ, लेखन शैली और भावनाएं अत्यंत सराहनिए है. बड़ा दुखी हूँ कि आप जैसे लोगो को बहुत बाद में पढ़ने का अवसर मिला खैर अब तो संपर्क बना ही रहेगा. जहाँ तक सचिन जी की बात है तो लोग अपने अपने द्रष्टि कोण से अपना मत रखते हैं. पर मैं क्रिकेट में कुछ खास नहीं जानता हूँ आज तक कभी खेला भी नहीं. यूँ कहिये मेरी उसमे कोई रूचि नहीं हैं पर सचिन जी के कारण देश को सम्मान मिलता रहा है ये देख कर खुशी होती है और उनका बड़ा आदर करता हूँ वो महज एक खिलाड़ी ही नहीं एक अच्छे विचारक भी हैं वो जो भी निर्णय लेंगे वो क्रिकेट प्रेमियों तथा देश के हित में ही होगा. इसी आशा के साथ...... प्रणाम.

के द्वारा: ashishgonda ashishgonda

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: प्रवीण दीक्षित प्रवीण दीक्षित

आज के हिन्दुस्तान के जो हालात चल रहे हैं, घोटाले पर घोटाले और उन घोटालों में हो रहे सरकारी नुकसान को पूरा करने के लिए आम आदमी को महंगाई के बोझ तले दबाते हुए सरकारी फैसले एक के बाद एक नित नयी आक्रोश की चिंगारी आम आदमी के दिल में जला रहे हैं। और अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हिन्दुस्तान में भी मिस्र जैसे हालत होंगे !! बाहरी , विदेशी ताकतों से तो पता नही पर अपने ही घर में गृह युद्ध की संभावनाएं जरुर बन रही हैं !! सरकार की दमनकारी नीतियाँ अगर इसी तरह आम आदमी को दबाती रही तो ये आक्रोश बहुत ही जल्द एक महाविस्फोट के रूप में नजर आएगा और जिसका परिणाम शायद वो होगा जिसकी कल्पना हम में से शायद कोई नही कर सकता है..!! प्रिय प्रवीन जी, नमस्कार! आपकी चिंता जायज है मैं तो यही कहूँगा- न लो मेरे सब्र का इम्तिहान! एक चिंगारी से जल सकता है सारा हिन्दोस्तान!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री प्रवीण जी ,..सादर अभिवादन सुन्दर चुटीला व्यंग्य ,....त्रेता युग में जाब सच्चे साधु थे तब भी रावण ने माता सीता को हरने के लिए साधु वेश धारण किया था ,....छदमवेशी हर युग में रहे हैं ,...आजकल कुछ ज्यादा ही हैं ,.इसका तात्पर्य सभी का ढोंगी होना नहीं है ,....संपत्ति का होना और उसका जनहित में सदुपयोग होना अच्छी बात है ,....भारत इसलिए गरीब है क्योंकि हमारी पूंजी पर पश्चिमी मुल्क और अमेरिका ऐश कर रहा है ,..यह कुछ देशद्रोही राजनीतिक खानदानों और पूंजीपतियों की कृपा से है ,....घोटाले दर घोटाले हो रहे हैं ,...बाबा रामदेव सालों से देश की ख़ाक छान रहे हैं ,..डॉ.स्वामी गद्दार गांधियों की बखिया कब से उधेड़ रहे हैं ,...लेकिन मीडिया को उन्हें दिखाने की फुरसत् नहीं है ,...आजकल अरविन्द भाई छाए हैं ,..चिपकू मूरख जनता वाह वाह की मुद्रा में है ,..यह भी एक ढोंग लगता है ,.. हमें एकजुट होना ही होगा ,...मानवता ,राष्ट्र और धर्म पर गंभीर खतरे हैं ,...सुन्दर पोस्ट और उत्तम आवाहन के लिए हार्दिक साधुवाद ...दीपपर्व की हार्दिक मंगलकामनाएं ..सादर

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

ज्योति पर्व की मंगल कामनाएँ ! व्यंग्यपरक आलेख; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "भाईजान ’हीरो’ हैं। वे अगर एक बार कमिटमेंट कर लेते हैं तो फिर किसी की भी नहीं सुनते हैं। चाहे वो उनकी कार से मरा हुआ व्यक्ति हो,काला हिरन हो ,पुलिस हो या फिर कोर्ट। अरे वाईपी साहब आपको शायद नहीं पता कि भाईजान एक ’सेलेब्रिटी’ हैं। और सेलेब्रिटी कोई जुर्म भला कैसे कर सकता है! जुर्म तो केवल आम आदमी ही करता है न! क्या कभी किसी वीआईपी को सालों तक जेल में रातें काटते सुना है? अच्छा-अच्छा शायद ऐसे लोगों की समाज को जरूरत होती होगी। इसीलिए उन्हें ज्यादा दिनों तक जेल में नहीं रखा जा सकता। वैसे भइया, ये ’वीआईपी’ का टैग भी बड़ी चीज है।"

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

के द्वारा: praveendixit praveendixit

के द्वारा: kuldeepsingh3733 kuldeepsingh3733




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